मै हूँ गब्बर


अगर किसी फिल्म की बात उसकी कहानी से ज्यादा आपको अच्छी लगे, तो फिर उस चीज़ का मजा ही कुछ और हो जाता है ।वही बात मुझे गब्बर फिल्म में दिखी,इसलिए मैं उसके बारे में लिख रहा हूँ ।यह फिल्म का रिव्यू नहीं, बस उसका एक अवलेखन मान लिजीए जो इस फिल्म की महत्ता को दर्शाता है ।कई बार किसी फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि उस फिल्म में दर्शायी हुई बात महत्वपूर्ण होती है ।गब्बर फिल्म में भ्रष्टाचार रूपी कुप्रथा को रोकने की बात कही गई है, वह वाकई में सराहनीय है और इसका समर्थन सभी को करना चाहिए।

भ्रष्टाचार को इस फिल्म में बरे अच्छे से पेश किया गया है ।हालांकि इस बिमारी से लड़ने का तरीका वो नहीं जो इस फिल्म में दिखाया गया है पर इस फिल्म में युवाओं को जगाने का भरपूर प्रयास किया गया है जो वाकई असरदार है ।सही है, अगर युवा वर्ग लामबंद हो जाए तो यह देश इन भ्रष्ट लोगों से मुक्त हो जाएगा ।

हालांकि हमें क्या मतलब इन सब चीजों से ? हमें तो 35-40 हजार की तन्ख़्वाह वाली नौकरी मिल ही गयी है जिससे हम मजे में जी रहे हैं ।हमें कौन रोक सकता है ।हम तो और पैसा कमाएंगे और खुश होकर जीऐंगे ।पर असल में हम कर सकते हैं अगर हम जो भी करें उसके पीछे हम किसी तरह का फायदा या फिर नुकसान न देखें ।

जरूरी नहीं है कि हम इसको खत्म करने हेतु सिवील जैसी सरकारी नौकरीयों के पीछे भागें ।हम किसी भी तरीके से इसे मिटा सकते हैं ।तभी हम इस पूरे तंत्र का कायांतरण कर सकते हैं ।और तब हम कह देंगे कि हाँ मैं गब्बर हूँ ।

मेरी तरफ से इस फिल्म को 4.5 अंक ।।


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