सड़क का डॅान कौन ?


आजकल सड़क दुर्घटनाओं में मारे जा रहे लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है ।एक खबर के मुताबिक भारत में अब तक तकरीबन 1,35,000 लोग सिर्फ सड़क दुर्घटना के कारण मारे जा चुके हैं ।क्या कारण है कि भारत में ऐसी स्थिती बनी हुई है ? इसका एक कारण है सड़क नियमों की अनदेखी करना जिसकी वजह से दुर्घटनाएँ हो रही हैं। आपको जहाँ- तहाँ ऐसे लोग मिल जाएंगे, जो सड़क नियमों की अनदेखी करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं ।उस पर पुलिस भी मामूली चलान काट कर,पूरे मस़ले को रफ़ा-दफ़ा कर देती है ।इस मामले पर तो कई जगह सुनवाई तक नहीं हुई, जो वाकई निराशाजनक है ।

उधर देश में जिस तेजी से चार-चकिया वाहनों की संख्या का इज़ाफा हुआ है, उससे ये साबित होता है कि भविष्य में पैदल चलने वालों को जगह कम पड़ेगी ।चाहे घर हो या न, पर गाड़ी रहना सबके लिए जरूरी है तभी तो हम बगल वाले शर्मा जी की बराबरी कर सकेंगे ।अगर हाथ देकर भी उन्हें ईशारा करो, तो वे जानबूझकर गाड़ियों की रफ्तार और बढ़ा लेते हैं । यहाँ तक कि जेबड़ा क्रॅसिंग पे भी चलने के लिए दो बार सोचना पड़ता है ।सड़क , मानों जैसे इन गाड़ियों और उनके मालिकों के लिए ही बनी है ।

कई और चीजें हैं, जो इन घटनाओं को आमंत्रित करती हैं ।कार के भीतर हेडफोन लगा कर गाड़ी चलाना और, शराब पीकर भी ।वाकई में इन सब चीजों के कारण इस तरह की घटनाओं का ज्यादा ईज़ाफा हुआ है ।

उधर किरण ख़ेर ने कुछ महीनों पहले गुड स्मार्टियन बिल का प्रस्ताव दिया है, वो वाकई में अच्छा है ।हममें से कई लोग रास्ते में पड़े दुर्घटना ग्रस्त व्यक्तियों की मदद करने से कतराते हैं, जिससे कई जानें बचने के बजाए ही समाप्त हो जाती हैं ।लोगों की मदद न करने का कारण ये भी है, कि हम कानून के पचरे में पड़ना नहीं चाहते हैं ।पता चला कि मदद के बाद पुलिस ने हमें ही सवालों के घेरे में डाल दिया ।


तो इस बिल के द्वारा ये लोग कानून की पेंचिदगी से बाहर हो जाएंगे ।यानी आप मदद करो तो, आपसे कोई सवाल नहीं करेगा जो वाकई अच्छा है ।इस बिल पर तो चर्चा होनी ही चाहिए,और साथ ही सरकार को ये भी सुनिश्चित करना होगा की सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े कानूनों की अनदेखी न हो ।साथ ही, अगर जरूरत परे तो ईसमें बदलाव भी किया जा सके ।     


फोटो आभार :caraccidenttodaykin.blogspot.in

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