Posts

Showing posts from July, 2015

एक फिल्म देखी जिसका नाम है 'मशान'

यह फिल्म कई मामलो में दर्शन शास्त्र पर आधारित है जहाँ जीवन की घटनाओं को रेखांकित किया गया है ।फिल्म की कहानी में जीवन के मूलसिधांतों को पिंड़ोया गया है ।फिल्म की कहानी में कई पहलुओं को एक साथ बताया गया है ।उसमें से इस कहानी में एक पहलू कुछ इस प्रकार है कि एक लड़की जिसका नाम देवी है जिसे निभाया है अदाकारा मुग्धा गोड्से ने परेशान है दुनिया के इस व्यवहार से जहाँ उसके प्यार को समाज हवस का आईना समझकर उसे देखती है ।ऐसा इसलिए है क्योंकि अगर कोई प्रेमी जोड़ा किसी होटल में शारिरीक संबंध बनाते हुए पुलिस के द्वारा एक साथ पकड़ा जाए , और दुर्भाग्यवश अगर वो लड़का इस बात के समाजिक होने के डर से आत्महत्या करले कि तो लोग आपको ही गुनहगार मानेंगे । दूसरा पहलू यह है कि एक डोम समाज के निम्न दर्जे का युवक अगर किसी कारणवश किसी उंचे दर्जे की युवती को दिल दे बैठे और फिर उस लड़की को खो बैठे क्योंकि वह मर चुकी है तो यह एक अलग उपद्रव मचा देता है । इसके साथ - साथ उनसे जुरे लोगों का क्या होता है जैसे की पापा , भाई , दोस्त इत्यादि । साफ - साफ है कि कहानी पूरी तरके से समझने वाली है जिसका बहुत ही ...

कलाम को सलाम

एक ऐसे व्यक्ति जो विचारों को उपर रखते हुए किसी भेदभाव से परे थे ।चाहे वो धर्म को हो या फिर किसी और चीज का , उनकी सोंच हमेशा उन्हें दूसरों से हटकर बनाती थी ।उनकी ये बात हम कभी भूल नहीं सकते जब उन्होंने जातीय भेदभाव को मिटाने की मांग की थी ।उसी तरह युवाओँ को देश का भविष्य बताते हुए उन्होंने उन्हें आगे बढ़ने की नसीहत दी थी ।उनके अनुसार जो सपना आपको रातों को जगाए , वही असली सपना होता है ।उनके अनुसार सपने देखो और बड़े सपने देखो । जिस तरह वे अपने पैरों पर खड़े हुए वह वाकई में सराहने योग्य है ।एक पेपड़ बेचने वाला इंसान इस तरीके से ऊंचाईयों को छू सकता है , यह कभी किसी ने सोचा भी न होगा । उन्हें शत - शत नमन ।

ये सवाल आप पर छोड़ता हूँ ।

क्या मेनन को फाँसी मिलनी चाहिए? यह सवाल आप अपने आप से पूछें ? पहले मुझे भी यही लगता था कि उसे फाँसी मिलनी चाहिए पर फिर मेरी नजर बी . रमण के द्वारा लिखी गई एक आलेख़ पर परी जहाँ उन्होंने मेनन को फाँसी दिए जाने के संदर्भ में अपनी अभिव्यक्ति रखी है ।उनके अनुसार अगर हम मेनन के द्वारा की गई 1994 के पहले की घटनाओं पर नज़र डालें तो लगेगा कि उसे फाँसी मिलनी चाहिए , पर बाद में जिस तरीके से उसने भारतीय जाँच दल की मदद की -कई आतंकियों को पकड़वाने में -वह वाकई में उसे माफी दिलाने योग्य है । मैं यही कहूंगा कि कहीं - न - कहीं मेनन के दिल में अच्छाई उभर कर सामने आई है । उसकी सराहना होनी चाहिए ।न कि उसे खत्म कर देना चाहिए ।वैसे भी सुबह का भूला अगर भटकर शाम को घर आता है तो उसे भूला नहीं कहते ।ये मेरी राय है मेरी इन बातों का बुरा मत मानिएगा ।वैसे भी जब हम सलमान खान के लिए अपनी दड़ियादिली पेश कर सकते हैं , तो मेनन साहब के लिए क्यों नहीं । धन्यवाद