कलाम को सलाम



एक ऐसे व्यक्ति जो विचारों को उपर रखते हुए किसी भेदभाव से परे थे ।चाहे वो धर्म को हो या फिर किसी और चीज का , उनकी सोंच हमेशा उन्हें दूसरों से हटकर बनाती थी ।उनकी ये बात हम कभी भूल नहीं सकते जब उन्होंने जातीय भेदभाव को मिटाने की मांग की थी ।उसी तरह युवाओँ को देश का भविष्य बताते हुए उन्होंने उन्हें आगे बढ़ने की नसीहत दी थी ।उनके अनुसार जो सपना आपको रातों को जगाए , वही असली सपना होता है ।उनके अनुसार सपने देखो और बड़े सपने देखो ।

जिस तरह वे अपने पैरों पर खड़े हुए वह वाकई में सराहने योग्य है ।एक पेपड़ बेचने वाला इंसान इस तरीके से ऊंचाईयों को छू सकता है , यह कभी किसी ने सोचा भी न होगा ।


उन्हें शत-शत नमन ।

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