नए युवा की नई सोंच
नए लोग, नई ख़ोज, और नई सोंच बस यही होनी चाहिए आज के युवाओं की सोंच चाहें कितनी भी अस्हिषणुता आ जाए इस देश में, उन्हें ताकत प्रशस्त करनी होगी उन लोगों के खिलाफ जो हैं भेड़ियों के वेश में । परिस्थिती बिखरेगी डराएगी आके टकराएगी पर अगर आप घबराए नहीं तो वह भी पीछे हट जाएगी । तो युवाओँ को भी यही सोंच कर आगे बढ़ना होगा क्योंकि रास्ता कठिन है बड़े आराम से चलना होगा । भले ही राजनीति की जड़े कमजोर क्यों न पर गई हों उन्हें जल बनकर उसे सींचना होगा । सिर्फ बोलकर कुछ नहीं होगा, उन्हें राजनीति में घुसना होगा ।