लक्षय ही जीवन है

है जीवन में एक लक्षय अगर तो ये जीवन है 
वर्ना पैसा तो हर कोई कमाता है ।
पैसे से कभी नाम नहीं मिलता 
और नाम तभी होता है जब व्यक्ति लक्षय को पाता है ।

मां-बाप पास होते हैं एक समय तक,
आखिर रास्ते की दूरी तुम्हें ही तय करनी है अपने लक्षय तक ।

कितने ही लोगों को कुछ खो कर ही मिलता है,
चाहे वो सिकन्दर या फिर अख़बर ही क्यों न हो ।

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