बिहार की चिंता
जैसे-जैसे
बिहार चुनाव की खटखटाहट तेज
हो रही है,
सभी पार्टियों
की चुनावी रणनीती भी तेज हो
रही है ।कभी किसी मांग पर बिहार
बंद हो जाता है तो कभी किसी के
आने पर बिहार को पचास लाख करोड़
का पैकेज मिल जाता है ।साफ है
सभी की मंशा यही है कि इस बहती
गंगा में हाथ धो लें ।पर यह
गंगा किसके माथे पर ताज संवारेगी
और किसके माथे पर गजऱा ये तो
वक़्त ही बताएगा ।लेकिन इस
बार का चुनाव बिहार की तरक्की
के ऊपर कम ,आपसी
रंजिश को मिटाने को लेकर ज्यादा
दिख रहा है ।एक समय नीतीश जिसके
नाम से खिंजते थे आज उसी को
गले लगाए हुए फिर रहे हैं ।साफ
है वो चाहते हैं कि किसी तरह
नरेंद्र मोदी को बिहार से दूर
रखा जाए ।
वहीं बीजेपी पूरी
तरह आश्वस्त दिख रही है बिहार
में अपने आने को लेकर ।पर ये
इतना आसान भी नहीं है जितना
वे समझ रहे हैं ।अभी उन्हें
कई पापड़ और बेलने होंगे तभी
शायद उनकी नैया पार हो सकेगी
।वहीं अब लोग भी मोदी के चुनावी
जुमलों पर गौर करने लगे हैं
।वे समझने लगे हैं कि मोदी
सरकार बोलती कुछ और है और करती
कुछ और ।साफ है बिहार की जनता
हाल ही में हुए लोकतांत्रिक
गतिवीधी को नजरंदाज करना नहीं
चाहेगी ।
सुषमा
,वसुंधरा
,पंकजा
और शिवराज आदि के आपत्ति में
आने पर शायद ही इस चुनाव में
बीजेपी अपनी साफ-
सुथरी छवि
के साथ उतर पाए ।उधर दिल्ली
में हुई बुरी हार के मद्देनजर
केजरीवील सरकर के ख़िलाफ
बीजेपी के करे रूख़ को भी देश
की जनता गलत मान रही है ।ऐसे
में बिहार के मझे हुए खिलाड़ियों
को टक्कर दे पाना आसान नहीं
होगा ।जाहिर है इस चुनाव में
मोदी को काफी चुनौतियों से
गुजरना होगा ।
धन्यवाद
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