कोई और आए जो डूबती नैया बचाए


ये मेरे कहानी का शीर्षक नहीं है,बल्कि ये दिग्वीजय सिंह के मन की कल्पना होगी जो उन्हें आर्ष्रित कर रही है की वो कांग्रेस पार्टी के बारे में सोचें।अगर ऐसा नहीं है तो फिर उन्होंने ईकोनौमिक टाईम्स को ये बयान क्यों दिया की राहुल की छुट्टी अवैध है ।ये साबित करता है की दिग्विजय राहुल के कार्यशैली से खफा हैं।इससे ये भी साबित होता है की वो अब समझने लगे हैं की कांग्रेस पार्टी को बचाना है तो गांधीगिरी छोड़नी होगी ।राहुल,सोनिया और प्रियंका से ऊपर उठकर सोचना होगा ।

कांग्रेस का अस्तित्व अभी काफ़ी ख़तरे में है,खासकर हाल के चुनाव के नतीजों ने इस पार्टी को लगभग डूबा दिया है ।कांग्रेस को एक ऐसे खेवैया की तलाश है जो इस पार्टी को डूबने से बचा ले ।दिग्विजय सिंह खुद भी चाह रहे होंगे की वो ही मार्गदर्शक बनकर अवतरित हो जाएं कांग्रेस पार्टा के लिए।

अब देखना ये होगा की आगे की स्थिती क्या होती है ?


   

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