गैंग्स आफ Rajnitiपुर-पार्ट 1
दोस्तों, हाल ही में आई हुई किसी फिल्म का
अगर मुझे रिमेक बनाना हो तो उस फिल्म में मैं राजनितीक परिवेश जरूर दूँगा ।ऐसी ही
ऐक फिल्म का नाम मैनें सोच रखा है,जो की है गैंग्स आफ Rajnitiपुर।फिल्म की शुरूआत
होती है रीजनिती के उस गलियारे से जहाँ एक राजनितीक दल जो की वर्षों से भारत की
राजनिती पर कब्जा बनाए हुए है..अब ऐसा लगने लगा है की उस पार्टी का अंत शुरू हो
गया है ।वहीं उस पार्टी को चुनौती देने के लिए कई सारी दूसरी पार्टीयाँ खड़ी हो
चुकी हैं ।कुछ गली-मोहल्लों तक ही सिमीत
रहने वाली छोटवईयन गुंडों के झुंड समान छोटी पार्टी है, तो कुछ शहर को मुठ्ठी में
रखने वाली डी-गैंग जैसी बड़ी पार्टी भी ।
एक पार्टी का अंत होता है तो दूसरा आता है
।अबकी बार जो पार्टी आई है उसने राजनितीक पकड़ बनाने के लिए पहले ही कई सारे
हथियार जैसे की धर्म,जाति ईत्यादी का इस्तेमान शुरू कर दिया है, तो पुरानी वाली
पार्टी भी कम नहीं है ।अगर एक-एक करके दोनों का किस्सा गिनाने लगूँ तो क्लाईमैक्स
आ जाएगा ।
फिलहाल जो पार्टी आई है उसके नेता रामाधीर
सिंह हैं,जिन्होंने पूरे भारत की राजनिती पर कब्जा बना लिया है ।रामाधीर सिंह ने
पहले तो सरदार खाँ के पिता माफिक गुरू को रास्ते से हटाया ...फिर उनकी जगह खुद ले
ली ।सरदार खाँ ने सोच लिया है की किसी भी तरह भारत की राजनिती से रमाधीर सिंह का
नाम हटना ही चाहिए ।उसने ठान लिया है की जब तक रामाधीर सिंह को हीरो से जीरो न बना
दूँ,चैन से नहीं बैठूँगा ।यही सोचकर उसने अपने मोहल्ले के मुखिया का पद त्याग दिया
।और खुद की जगह नेता चुनकर बिठा दिया सुल्तान को ।
सुल्तान जो की शुरू में सरदार खाँ के साथ है..
अचानक ही पाला पलटकर रामाधीर सिंह का दामन
थाम लेता है ।पर किसी तरह सुल्तान को सरदार के समक्ष हार माननी ही पड़ती है ।सरदार खाँ फिर से मुखिया बनते हैं।सरदार को मालूम हो जाता है की मुखिया बनने में ही फायदा है ।
उधर रामाधीर सिंह को एक और मोहल्ले से चुनौती
मिल रही है जिसका मुखिया फ़ैजल खाँ है ।फ़ैजल
जिसने पहले भी रामाधीर को उसी के ईलाके में जाकर चुनौती देने का प्रयास किया
था..पर उस समय उसे हार का सामना करना पड़ा था। बाद में फैजल ने सोचा की अगर रामाधीर को हटाना है तो अपने ईलाके
में पकड़ मजबूत करनी होगी ।
वैसे रामाधीर को चिंता नहीं है क्योंकि उसके
गैंग के कई साथी राजनितीक गलियारों में छाए हुए हैं ।अगर कहा जाए तो फिल्म में
रामाधीर का लगभग हर ईलाके में राज है ,सिवाए कुछ ईलाको को छोड़कर जहाँ सरदार खाँ और फैजल खाँ जैसे लोग
भी हैँ ।
अब देखना ये होगा की रामाधीर सिँह इन जैसे
लोगों का सामना कैसे करते हैं.....ये हम जानेंगे अगले पार्ट में ।
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