कोई तो रोको इसे
भ्रष्टाचार आपको ङर जगह मिल जाता है । किसी सिनेमाघर
के टिकट घरों के बाहर से लेकर बड़े
अधिकारी के आफिस तक ।और हमारा भी उन भ्रष्ट तरीकों से काम चल जाता है तो फिर हर्ज
ही क्या है ?हर्ज है तभी तो आप जैसे लोग अन्ना के समर्थन में रामलीला जाम कर देते हैं
।बड़ी-बड़ी बातें करने लगते हैं, और कहने लगते हैं कि भ्रष्टाचार कम क्यों नहीं हो रहा
है
?अरे जनाब कम कैसे
होगा जब हम भ्रष्टाचार नुमा नाटक में सहायक भुमिका अदा कर रहे हैं ।
अभी कुछ ही दिन पहले मैनें मध्यप्रदेश के
सिधी गांव के एक व्यक्ति से हाल-चाल जाना, तो उसने इस नाटक की अपनी भुमिका बतानी
शुरू कर दी ।बोला 2 लाख खर्च कर दिए फिर भी पुलिस की नौकरी नहीं मिली ।और–तो-और
डिग्री योग्य होने पर भी पुलिस का काम नहीं मिला।बताईए कहीं कुछ, तो कहीं कुछ,
मानो यह कारोबार पूरे पैमाने पर फैला हुआ है ।उसी तरह एक और घटना का जिक्र मैं
यहाँ उचित समझूंगा ।
कांग्रेस की इंदिरा आवास योजना वाली स्किम
बड़ी अच्छी है ।पर जमीनी स्तर पर इसकी सच्चाई बिलकुल ही अलग है ।मेरा गांव पताही
जिला है । वहाँ सभी लोगों से फ्री आवास बनाने के लिए 10,000 से भी ज्यादा रकम
इक्ठ्ठा कराए गए हैं ।फिर फ्री काहे का, और तो और किसी ने उसका विरोध भी नहीं किया
है ।
दोस्तों, दरसल गलती हमारी भी है जो हम इन सब
चीजों के आगे न बोलकर चुप हो जाते हैं ।हम निर्भया वाले विवाद पर चिल्ला सकते हैं
पर सत्येंद्र दुबे या फिर डी.के.रवि जैसी घटना पर न्यूज़ बदल देते हैं । जो
भ्रष्टाचार के लिए लड़ना चाहता है उसी के लिए हम खड़े नहीं होते हैं ।कैसे मिटेगा
भ्रष्टाचार, जब हम हैं इतने लाचार ।
हम प्राईम टाईम पर विराट कोहली और अनुष्का
शर्मा कर सकते हैं पर इन सब चीजों के लिए वक्त नहीं निकाल सकते हैं ।दोस्तों , मैं
कोई भाषण नहीं दे रहा हूँ , मैं बस अपना विचार रख रहा हूँ । और सुप्रीम कोर्ट के
आदेश के बाद अब मुझे खुली आजादी है ।
नमस्कार

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