इतिहास की पुनरावृत्ति
कहते हैं, इतिहास अपनी पुनरावृत्ति जरूर करता
है, और ये बात सच साबित होती है बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संदर्भ में ।एक
समय लालू के साथ चलने वाले नीतीश, उनसे क्रोधित होकर पार्टी से अलग हो गए थे ।तब
उन्होंने लालू को हटाने हेतु बीजेपी का दामन थामा था, और सिर्फ इसी वजह से वे गुजरात
दंगे के बाद भी मोदी का पक्ष ले रहे थे ।तब वे पूरे गुजरात दंगे को एक घटना मान
रहे थे ।आज उसी दंगे को वे उत्तेजना के संदर्भ में देख रहे हैं ।तब वे मोदी जी का
पक्ष लिए फिर रहे थे ।आज वे उन्हीं के खिलाफ हैं ।आखिर क्या वजह हो सकती है ?जानकार मानते हैं कि तब
नीतीश बिहार की गद्दी को पाना चाहते थे इसलिए ही शायद वे बीजेपी के साथ थे । आज आप
सब को पता ही है मैं क्या कहना चाहता हूं ।
आज वे मोदी को हटाना चाहते हैं जिस कारण वे
लालू के समर्थन के लिए अमादा हो चुके हैं ।जिस लालू को एक वक्त हटाने के लिए वे
बीजेपी के साथ खड़े थे और मोदी का समर्थ न कर रहे थे , अब वे मोदी को हटाने के लिए
लालू को समर्थन करते दिख रहे हैं ।
क्या ये प्रधानमंत्री की ख़्वाहिश है , हम कह नहीं सकते हैं ।
क्या ये प्रधानमंत्री की ख़्वाहिश है , हम कह नहीं सकते हैं ।
लेकिन इस पूरे कथन से इस बात का एहसास हो गया
कि राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है । इसलिए राजनीति इतनी दिलचस्प है ।
धन्यवाद

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