धर्म का कीड़ा


नेकी कर और दरिया में डाल, यही आपको पढ़ने मिलेगा सभी धर्मों की ग्रंथावली में ।साफ –साफ है कि अच्छाई ही सबसे बड़ा धर्म है। लेकिन, कोई एक संगठन है जो धर्म को ग्रंथो के ऊपर समझने लगा है ।उसके अनुसार, उसका धर्म ही सभी धर्मों को पदाक्रांत कर चुका है ।जो कि वाकई गलत है ।आप किसी धर्म को निशाना बनाकर अपने धर्म को सही साबित नहीं कर सकते हैं ।उधर हमारी निष्ठुरता ने उन्हें हीरो बना दिया है ।ऐसा नहीं है कि, सिर्फ एक धर्म के अंदर कोई इस तरह का संगठन काम कर रहा है ।और तो और, इस संगठन को चलाने वाले  मठाधीश भी बैठे है वहाँ ।हजारो भरे परे हैं उस जगह पर , पर हाल ही के दिनों में हुए इस संगठन की गतिविधीयों ने मुझे मजबूर कर दिया कि मैं इस पर लिखूँ ।आखिर लिखूँ भी क्यूँ न, इस देश का आम नागरिक होने के कारण मुझे अपने विचारों को प्रकट करने की आजादी है ।

धर्म विरोधी गतिविघीयों में इस संगठन का नाम हमेशा ही दूसरों से परे रहा है । किसी धर्म की ईदारों को मिटाने में इस संगठन के लोग हमेशा से सक्रिय रहे हैं ।कोई कुछ कर भी नहीं सकता क्योंकि पूरी प्रणाली ही मानों उनके वश में है ।अब उन्होंने एक ऐसी बात कह डाली जो मेरे तर्क को परिपूर्ण कर देगा ।उनके अनुसार इसाई लोगों के कार्यों में निहितार्थ भाव जुड़े रहते हैं ।उनके अनुसार वे कार्य लोगों की भलाई के लिए नहीं होते हैं, जिससे समाज को नुकसान पहुँचता है ।

पर वे शायद, मदर टरेसा द्वारा किए गए कार्यों के अंकगणित को भी भूल चुके हैं ।इसका प्रमाण इससे भी  पता चलता है कि , अभी कुछ दिन पहले ही उन्होंने मदर टरेसा पर भी कटाक्ष किया था ।मेरी मानें तो उन जैसे लोगों को इतिहास के पन्ने पलटने की जरूरत हैं ।हमारे इतिहास में कबीर जैसे लोग हुए हैं जो धर्म से कहीं ऊपर थे ।मुसलमान होने के बावजूद भी उनकी प्रतियाँ हिन्दू समाज के लिए ग्यानवर्धक है ।और भी, क्या वे मौलाना आज़ाद की सोच से भी प्रभावित नहीं हैं ?

उन जैसे लोगों को पहले अपने धर्म के आंकलन करने की जरूरत है ।हमारे धर्म के अंदर जो जातिवाद का कीड़ा है , उसे कौन ठीक करेगा ।अगर कुछ करना ही है तो सबसे पहले वे इन त्रुटियों का निवारण करें ।

    

Comments

Popular posts from this blog

सड़क का डॅान कौन ?