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Showing posts from March, 2015

Floods in Kashmir

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Crisis in Jammu and Kashmir hit majorly, after the flood gate has opened its door while submerging parts of the state. According to our reports, the situation might be of similar status as there was in 2014.Perhaps, this time it gets much bigger. With Water getting stacked over the streets, there are huge chances of people getting affected by the epidemic diseases. The list includes Cholera, Diarrhea and many more. But, the question lies that how well are we prepared now for such kind of disaster? Having, just few months passed after the 2014 disaster, the incoming of this flood has really showcased us our unpreparedness for such kind of disaster. According to the reports, the embankments near rivers are under check leading the water current to destroy it very easily. Why not, our embankment must be tightened enough in order to minimize the chances of such crisis. Also, while analyzing the perfect figure of river’s annual water ratio, we can have perfect idea about when th...

कश्मीर के भीतर बिगड़ते हालात

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कश्मीर घाटी के भीतर बाढ़ के कारण हालात बिगड़ती जा रही है, और कईयों के मारे जाने की खबरें भी आ रही हैं ।उधर प्रशासन इस स्थिती की गंभीरता को ध्यान में रखकर,पहले ही राहत कार्य में जुट गई है ।पिछले साल वाली बाढ़ ने इस साल भी आकर लोगों को चौंका दिया है ।पर पहले की परिस्थिती कुछ और थी, और इस बार बिलकुल अलग है ।पिछले साल वाली बाढ़ ठंड के मौसम के ठीक पहले आई थी,वहीं इस बार वाली बाढ़ ग्रीष्म ऋतु में आई है जो चिंता का विषय है ।चिकित्षकों की मानें तो बाढ़ के पानी के जलजमाव से कई तरह की बीमारियाँ लोगों को परेशान कर सकती है । चाहे कौलड़ा हो या फिर डाईरिया, बीमारीयों का फैलना लोगों के लिए मशक़्क़त भरे दिनों की शुरूआत होगी ।उधर सरकार को भी चाहिए की वे आपसी रंजिश भुलकर नेशनल कांग्रेस पार्टी के साथ इस मसले पर तलब करे ।क्योंकि पिछले साल आई इस संकट को नाकाम करने का जिम्मा ओमर अबदुल्ला के सर था, इसलिए उनके अनुभवों की राज्य सरकार को अति आव्यशक्ता  होगी । वहीं पिछले साल इस त्रासदी को कम करने में जुटे वे अधिकारी , इस साल भी बदले नहीं गए हैं ।सरकार के लिए उनके अनुभवों को भी साझा करना, लाभका...

उच्च अदालत ने अभियुक्तों को दी सूचना

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हाज़ी मेहबूब की एक अर्जी, जिसमें उन्होंने उच्च अदालत को बाबड़ी मस्जिद केस के बारे में अवगत कराया है, को ध्यान में रखकर आज उच्च न्यायालय ने आडवाणी सहित 18 अभियुक्तों को तलब किया है ।इस अर्जी के द्वारा हाज़ी मेहबूब का ये मानना है कि बीजेपी के शाषण काल में  सीबीआई शायद ही इस मामले को तरजीह दे ।वहीं आजवाणी समेत सारे अभियुक्तों को अलाहबाद उच्च न्यायालय ने पहले ही दोषमुक्त कर दिया है ।अब उनके लिए फिर से इस केस का सामने आना वाकई गंभीर विषय है । उधर अलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले का प्रतिरोध किए जाने के बाद, ऊपरी अदालत ने सीबीआई से भी इस मामले को लेकर तलब किया है और उनसे इस विषय को ऊपरी अदालत तक न ले जाने का कारण मांगा है ।मेहबूब का साथ ही कहना है- राजनाथ सिंह जिनका इस केस के भीतर भी नाम था, आज वे गृहमंत्री हैंं तो वाकई ये एक गंभीर मसला है । साथ ही मेहबूब का ये आरोप लगाया है कि, राजनीतिक परिस्थिती के बदल जाने से इस मामले पर सांविधिक प्राधिकारी का रूख़ भी बदल गया है ।मेहबूब साहब की इस अर्जी में ये भी रेखांकित किया गया है कि पहले के मुताबिक शायद इस बार सीबीआई इस केस को उत...

J&K facing deep flood again

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About six people have been found dead in Jammu and Kashmir, after the flood struck the state badly. Earlier, intense rainfall has already made Jhelum scaling above the normal, while setting it as one of the main reasons for flood. For that, even the disaster team has been placed to manage things before the crisis. Now, with people getting affected by this, the duty lies on the hands of central and state government to manage things properly. With situation getting much worse than before, the state government might have approached the central government already, for help. According to the reports, Mufti Sayeed has asked for the Military support to curb this catastrophe. Above all, there are also reports of landslide in the Udhampur region of the Jammu and Kashmir leading to the blockage of the state highways. Having already updated about the situation in the valley, the central government need to implement things which can help to manage this problem.  image courtse...

जम्मू-कश्मीर में फिर बजी ख़तरे की घंटी

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पिछले साल प्रचंड बाढ़ झेल चुका जम्मू-कश्मीर, इस बार भी इसके ख़तरे को लेकर गंभीर है ।खबरों की मानें तो, राज्य के भीतर बहने वाली झेलम नदी अपने ऊफान पर है जो कि तबाही की लकीर कभी भी छू सकती है ।झेलम के स्तर का इस तरह से उठना भारी वर्षा की देन है जिसने राज्य के कई हिस्सों को प्रभावित किया है । इस ख़तरे को देखते हुए, सुरक्षा दल की एक टीम वहाँ पहुँच गई है ,जो लोगों के बचाव को लेकर प्रतिबद्ध है ।ये अच्छा भी है कि पहले से तैयारी की जाए ।तभी जाकर राहत कार्य में कोई दिक्कत नहीं होगी । एक वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो इस बारिश ने झेलम का स्तर काफी बढ़ा दिया है ।जहाँ संगम(दक्षिण कश्मीर)इलाके में उसका स्तर 22.4 फुट रिकार्ड किया गया, तो वहीं राम मुंशी बाग(कश्मीर सिटी) में ये आंकलन 18.8 फुट पर लेखित किया गया है । इस मामले पर बोलते हुए एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि नदी के किनारे बसे लोगों को पहले ही ख़तरे की चेतावनी दे दी जा चुकी है । बुजूर्गों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर उन्हें पहले ही राहत शिवीर में जाने को कह दिया गया है । साथ ही उनका ये भी कहना है- अगर पानी का मानक 23 के ...

राहुल की वापसी

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राहुल गांधी की वापसी और भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ़ उनका ताजा-तरीन अभियान ।यही देखने को मिलेगा, 19 अप्रैल को होने वाली कांग्रेस की इस रैली में जिसे खुद राहुल गांधी संबोधित करने वाले हैं ।ऐसा बताया जा रहा है कि राहुल अपनी इस रैली के दौरान किसानों को संबोधित करेंगे ।सूत्रों की मानें तो उस रैली में उनका साथ निभाने के लिए कई बड़े दिग्गज भी वहाँ मौजूद होंगे ।जबसे संसद में भूमि अधिग्रहण बिल पर चर्ची उठी है , हर ओर इसके खिलाफ़ नारेबाजी का सिलसिला शुरू हो गया है ।कभी अन्ना तो कभी सोनिया, हर किसी ने रैली कर इसके विरूद्ध अपनी नाराज़गी जताई है । एक समय, इस बिल के खिलाफ़ अन्ना और सोनिया तक एक हो गए थे ।जिस वक्त इन रैलियों का दौड़ चल रहा था ,उस वक्त राहुल गांधी की अनुपस्थिती भी लोगों को काफ़ी ख़ल रही थी ।अब जब वो यहाँ उपस्थित हो गए तो कांग्रेस निश्चित ही उनसे किसी बड़े प्रस्ताव की अपेक्षा कर रही होगी ,जो शायद इस रैली के रूप में सामने आया है । उधर बीजेपी इस रैली को लेकर कितनी तैयार है, ये अभी देखना बांकि है ।वहीं कांग्रेस की इस  रैली को लेकर उनकी प्रतिबद्धता का अंदाजा तभी होगा, ज...

uproar in J&K assembly

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A controversy got erected, after Justice R.C Gandhi’s final report has claimed Kichloo’s name for his involvement in the 2013 kashtwar Riot case. Taking this report seriously, the BJP-PDP alliance has started raising questions against National Conference . Today, in the parliament, they have raised slogans against Kitchloo and four others already named in that list. Also, they have demanded their immediate arrest .The minister of Law and Parliamentary affairs, Basharat Ahmad Bukhari says “We haven’t examined the report yet, as been busy with our budget session.” Amid all these protests, the speaker of the house Kavinder Gupta pleaded all party members about the uncertainty to hold this issue as kitchloo is already out of this house. Following this, the members took their respective seats. It was during the NC's rule that the Kitchloo's name came upfront, after which he got removed from the National Conference party, but came back when the report acquitted him. Ey...

केजरीवाल का भावात्मक संदेश

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योगंद्र यादव और प्रशांत भूषण के पार्टी से निकाले जाने पर , उनके खिलाफ़ बोलते हुए केजरीवाल ने कहा-वे दोनों पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेद पैदा कर रहे थे ।जब पूरी दिल्ली बहुमत के साथ हमारे लिए खड़ी है , तो उन दोनों का हमारे खिलाफ़ होना वाकई में दु : खद है ।वो दोनों हमारे अच्छे मित्र होकर भी पार्टी के साथ खड़े नहीं दिखे हैं । दिल्ली चुनाव के दौरान, इस पार्टी को तोड़ने की कोशिश की गई थी ।ये एक षड्यंत्र था ताकि हम चुनाव हार जाएँ ।उनका कहना है कि प्रशांत भूषण ने कईयों को हमारे हारने की इच्छा तक जता डाली थी ।उनके अनुसार हमें तभी अक्ल आएगी जब हम हारेंगे । केजरीवाल ने साथ ही कहा- चुनाव के दौरान, हमारी मदद करने को कई साथी दिल्ली आना चाहते थे जिन्हें रोका गया ।और भी, पार्टी के भीतर गलत अफवाहों का प्रचार किया जिससे हम टूट जाएँ । केजरीवाल ने नम्न भरे स्वर के साथ ये सारी बातें कही हैं ।कुछ भी हो, पर मेरी राय में केजरीवाल अगर पहले ही इस विषय पर पुनर्विचार करते तों , शायद इतना झमेला न होता ।उधर अगर प्रशांत भूषण को इतनी ही दिक्कत थी, तो उन्होंने आवाज पहले क्यों नहीं उठाया ? केजरीवाल ...

आपका स्वागत है

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जहाँ एक ओर “ आप ” ने योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी निकाला कर दिया है , तो वहीं कोई और है जो उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करने को राजी है ।जी हाँ , वो कोई और नहीं बल्कि रिपब्लिकन पार्टी के मुखिया रामदास अठावले हैं ।जब कल पार्टी ने उन दोनों का ही चलाचली कर दिया, तो आज अठावले जी ने उन्हें सहारा देने का प्रयास किया है । पर भ्रमित कर देने वाली बात ये है कि आज अचानक रामदास अठावले जी को उन दोनों की जरूरत क्यों आन पड़ी  है । ये दाल है या फिर काली दाल ,ये तो मुझे पता नहीं ।पर राजनीति का खेल बहुत निराला है ,यहाँ कुछ भी हो सकता है ।उधर रामदास अठावले जी ने ये भी कहा- योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण, दोनों ही पार्टी के प्रमुख चहरें थे । और दोनों ने ही बहुमूल्य योगदान दिया है पार्टी की इस दिल्ली लोकसभा जीत में ।तो फिर, उनको निकाला जाना कहाँ तक सही है ? साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि वे उन्हें आरपीआई के साथ जोड़ना चाहते हैं ।रामदास अठावले का मानना है कि उनकी पार्टी अम्बेडकर के सिखाए सिद्धांतो के समीप है जो उन्हें लोगों के बीच आम बनाती है । तो, एक तरह से रामदास अठावले जी ...

Drift in AAP

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The fallout inside AAP has clearly shown us the contradiction of ideologies within this party. Today, the party has excluded their two key important members, Yogendra Yadav and Prashant Bhusan from its key panel. According to the reports, the drift was quite clear within AAP from the beginning, but it become quite visible after Arvind Kejriwal supporters started raising slogan against both of them. There came also report about scuffle against Yogendra Yadav by the supporters of Arvind Kejriwal.This issue become more evident, when some of its national council members were not allowed to attend this council meet. Finally, the meeting got over with a decision to make both of them out of this job. Among others, Anand Kumar and Ajit jha have also got terminated from this panel. So, in total four of the key party members got separated from the panel list, with 28 council members out of the total voted against them.  On this whole issue, the opposite party members have...

"आप" की मेधा चली गईं

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क्या बात है कि जिस कर्मण्यतावादी महिला के साथ एक वक्त पूरा देश "नर्मदा बचाओ आंदोलन" को लेकर खड़ा दिख रहा था, आज उसी के चले जाने से पार्टी को कोई फर्क महसूस नहीं हो रहा है ?जी हाँ, हम बात कर रहे हैं उस मेधा पाटकर की जिनके आने पर पार्टी मजबूत दिख रही थी, आज उसी के जाने के बाद पार्टी के भीतर कोई भावात्मक बदलाव नहीं दिख रहा है ।मेधा पाटकर ने अपने तर्क में पार्टी के भीतर चल रहे मनमाने गतिविधियों को इसका कारण बताया है ।और, साथ ही आज की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में होने वाली घटना पर भी शोध व्यक्त किया है । उनका कहना है- आज जो कुछ दिल्ली में हुआ , वह वाकई में दु : खद है ।जो चीज होना नहीं चाहिए था,वह हो गया है ।योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी से निकालना वाकई में निराश करने वाला फैसला है ।ये वही हैं जिन्होंने पार्टी के लिए, भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग छेड़ी है ।उनका इस तरह से निष्कासित होना वाकई में मेरे लिए दुखदायी है । जो , पार्टी इतनी बड़ी जीत हाँसिल कर लोगों का विश्वास जितने में कामयाब हुई है ,इन सब कारणों को लेकर अपनी छवि धूमिल कर रही है ।पार्टी को चाहिए था...

कोई इन्हें टोको !

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जब अंतर विरोध का सिलसिला बढ़ जाता है, तो बातचीत का भी कोई हल निकल पाना मुश्किल   है ।शायद, यही चीज दिख रही है आम आदमी पार्टी के भीतर जहाँ आपसी रंजिश और मनमुटाव ने भयंकर रूप ले रखा है ।क्या, कोई मान सकता है कि यह पार्टी कुछ दिन पहले 67 सिटों पर विजय उद्घोष करके दिल्ली आई थी ।जिस पार्टी के हर-एक सदस्य को एड़ी चोटी एक   कर इसे मजबूती से खड़ा करना चाहिए था, वही आज पार्टी के भीतरी कलह के भोगी हो रहे हैं ।इनमें वो नाम हैं, जिनसे पार्टी को बहुत उम्मीदें थीं ।हालांकि, स्थिती देखें तो पार्टी का बिखराव प्रतीत हो रहा है, वहीं कई पार्टी जन अभी भी एकजुटता को लेकर गंभीर मालूम पड़ रहे हैं । ये अच्छी बात है कि कई लोग अभी भी एकजुट होने का भाव रखते हैं , पर इस मनमुटाव के साथ सौहार्द की रणनीति बने भी तो कैसे ? उधर, इस पूरे मामले पर पार्टी शनिवार को मिलेगी जहाँ पार्टी के कुछ मुख्य सदस्यों की चलाचली हो सकती है ।अगर ऐसा हुआ, तो पार्टी दो खेमों में भी बंट सकती है । जो भी हो, लेकिन इस कारण "आप" पार्टी की संप्रभुता धूमिल होती दिख रही है ।अब, उसे और मेहनत करनी होगी ऊपर उठने के लिए । ...

वो अटल थे,अटल हैं और अटल ही रहेंगे !

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एक सरल इंसान, एक अच्छे वक्ता और एक ईमांदार नेता, ये तीनों गुण आज के दशक में शायद ही किसी व्यक्ति के भीतर समाहित दिखे ।पर कोई एक है,जो इस छवि का जीता-जागता उदाहरण है । वो कोई और नहीं, बल्कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी हैं।सरकार ने आज, उन्हें भारत के सबसे बड़े सम्मान के साथ नवाज़ा है ।और वो सम्मान है भारत रत्न का जो कि सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों की ही कल्पना है । ये अटल ही हैं, जिसने भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को साझा करने प्रयास किया था ।उन्हीं के दृढ़ निश्चय ने भारत में पहली बार परमाणु परिक्षण को सफल बनाया था ।ये वही हैं, जिसने पार्टी के अंदर हो रहे अनुपयोगी गतिविधियों का विरोध किया था ।गुजरात में हो रहे दंगों पर भी, उन्होंने नरेंद्र मोदी की तीखी आलोचना की थी । ये वही नेता हैं, जिसके सम्मान के लिए विपक्ष भी अपने आपको निम्न समझने लगते हैं ।यहाँ तक कि, जब संसद पर पहली बार हमला हुआ तो सोनिया ने सबसे पहले अटल जी को ही फोन कर उनका हाल-चाल जाना ।ये वो हैं, जिनकी सोंच नेहरू के समान दूरगामी और गांधी जैसी स्थिर है ।वो आज के दौड़ के राजनैतिक नेताओं से बिलकुल अलग दिख...

The AAP crisis

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The situation is taking a different turn inside AAP , and there two key members (Yogendra Yadav and Prashant Bhusan) are on the verge of getting separated from the party. Both of them, who have already got terminated from the PSC, in his letter questioned the working strategy of the party. They have also asked question regarding its own position within AAP. The letters of both, Yogendra Yadav and Prashant Bhusan, have clearly showcased the internal conflict the party is right now going with. However, its party member, Ashutosh in his letter has highlighted some major facts. According to him, the party has already accepted their five demands, after which they are supposed to retire from its all party’s post. To prove this, in his tweet, Ashutosh has even arranged the screenshot of that letter that has been written by both Yadav and Bhusan. On the other hand, Yadav is proving a different statement where he keeps denying about his resignation plan. He says “The letter which...