कोई इन्हें टोको !


जब अंतर विरोध का सिलसिला बढ़ जाता है, तो बातचीत का भी कोई हल निकल पाना मुश्किल  है ।शायद, यही चीज दिख रही है आम आदमी पार्टी के भीतर जहाँ आपसी रंजिश और मनमुटाव ने भयंकर रूप ले रखा है ।क्या, कोई मान सकता है कि यह पार्टी कुछ दिन पहले 67 सिटों पर विजय उद्घोष करके दिल्ली आई थी ।जिस पार्टी के हर-एक सदस्य को एड़ी चोटी एक  कर इसे मजबूती से खड़ा करना चाहिए था, वही आज पार्टी के भीतरी कलह के भोगी हो रहे हैं ।इनमें वो नाम हैं, जिनसे पार्टी को बहुत उम्मीदें थीं ।हालांकि, स्थिती देखें तो पार्टी का बिखराव प्रतीत हो रहा है, वहीं कई पार्टी जन अभी भी एकजुटता को लेकर गंभीर मालूम पड़ रहे हैं ।

ये अच्छी बात है कि कई लोग अभी भी एकजुट होने का भाव रखते हैं , पर इस मनमुटाव के साथ सौहार्द की रणनीति बने भी तो कैसे ?उधर, इस पूरे मामले पर पार्टी शनिवार को मिलेगी जहाँ पार्टी के कुछ मुख्य सदस्यों की चलाचली हो सकती है ।अगर ऐसा हुआ, तो पार्टी दो खेमों में भी बंट सकती है ।

जो भी हो, लेकिन इस कारण "आप" पार्टी की संप्रभुता धूमिल होती दिख रही है ।अब, उसे और मेहनत करनी होगी ऊपर उठने के लिए ।


फोटो आभार : somewherelost.com




    

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