भारत-पाक रिश्तों को देनी होगी मजबूती


 जब भी भारत-पाक रिश्तों की गांठ बंधने वाली होती है, किसी कारणवश रस्सी बीच में ही कट जाती है ।अभी जब दोनों मुल्कों के राजनेता, अपनी कड़वाहट भुलाकर आपस में मिलने जा रहे हैं तब लखवी जैसे आतंकवादी के रिहाई का फैसला कहां तक सही है ।हालांकी बाद में काफी तीखी प्रक्रिया के बाद उस फैसले को वापस लिया गया ,पर ये दर्शाता है उस मुल्क के अंदर आतंक की स्वायत्तता को ।आतंकी संगठन वहां अपनी मनमानी किए जा रही हैं, पर कोई हाथ तक हिला नहीं सकता है ।ऐसा क्यों है की जो मुल्क खुद आंतक से प्रतारित हो रहा है, उसी के अंदर ऐसी गतिविधियां सामने आ रही हैं ।कम-से-कम पेशावर में हुए हमले के बाद ऐसी कल्पना किसी ने नहीं की होगी ।

मामला कुछ ऐसा है की कोई कुछ करना भी नहीं चाहता ।सरकार भी चुप है और समाज ने भी इन हालातों को अपनी हकिकत बना रखी है ।कोई कुछ बोलने वाला भी नहीं है ।लोगों के अंदर खौफ ही उनकी ताकत बन गई है, जिसका फायदा उठाकर वे अपने अंजाम को पूरा करते हैं ।अब जब दोनों मुल्क एक बार फिर मिलेंगे, तो मैं आशा करता हूं की पाकिस्तान इस मामले पर भारत को आश्वासित करे ।हालांकी , वे कई बार आपना आश्वासन तोड़ चुके हैं , पर इस बार उनका रवैया ठोस होना चाहिए ।

चित्र शिष्टाचार :www.midday.com





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