क्यों नहीं हो रही गंभीर विषय पर कोई चर्चा ?
शरद यादव के बयान जिसमें वे दक्षिण-भारतीय महिलाओं को सुंदर बता रहे
हैं ,पर इतना विवाद क्यों ? क्या हम इसी सब में उलझे रहेंगे, और कई गहन मुद्दे को रफा-दफा कर देंगे ।अगर
उन्होंने कुछ गलत कह भी दिया, तो माफी मांग लें ।क्यों सभी जन तील का पहाड़ बनाए
फिर रहे हैं ? मेरी राय में संसद का सत्र कुछ मुख्य चर्चाओं के लिए होना चाहिए, न कि इस
तरह के आपसी मसलों पर बहसबाजी करने के लिए । चाहे वो राहुल गांधी के जासूसी वाला
मसला हो या फिर कोई और, क्या हमें सदन की मर्यादाओं का ख्याल नहीं करना चाहिए ?
चाहे वो स्मृती ईरानी वाला मुद्दा हो या फिर
राहुल वाला, बाल की खाल निकालने में सभी लोग आगे आ जाते हैं। उधर कतिपय चैनलों को
छोड़कर, तमाम खबरिया चैनल भी उसी बात को अपने प्राईम-टाईम का हिस्सा मानते हैं ।शायद
टी.आर.पी भी उसी चीज के लिए आती हो ।पर पत्रकारिता की टी.आर.पी में हम पीछे रह
जाते हैं ।
उधर फेसबुक और ट्वीटर को भी इसी मुद्दे ने
हाईजैक कर रखा है ।जहाँ देखिए वहाँ, सिर्फ इसी मुद्दे पर परिचर्चा चल रही है ।कोई
कुछ, तो कोई कुछ हर तरफ एक ही मुद्दा गरमाया हुआ है ।
हम सभी भी बड़े खुशी-खुशी इन चीजों के साथ
खुद का साक्षातकार करते हैं । हमें तो बस मनोरंजन चाहिए जो हमें मिल रहा है ।
हमें
क्या पड़ी है देश-हित की ? माफी चाहता हूं , पर हम ऐसे हो गए हैं ।
धन्यवाद
चित्र शिष्टाचार:www.itimes.com
SHARAD Yadav is a prized dolt. He belongs to a circus of owls and not in Parliament. Duffer.
— SUHEL SETH (@suhelseth) March 16, 2015
Arun Jaitley demands clarification from Sharad Yadav in the Rajya Sabha for his remark on women.
— Firstpost (@firstpost) March 18, 2015

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