चोर की दाड़ी में तिनका
दोनों ही पार्टी, चाहे वो कांग्रेस हो या
बीजेपी जब आपस में भिड़ती हैं.. तो उनके लिए ये भिड़त नाक की लड़ाई बन जाती है ।हर
कोई अपने कार्यभार में एक-दूसरे को नीचा दिखाने की तमाम कोशिशों में अपनी अवधि
समाप्त कर देता है ।वैसे तो हर देश में सभी पार्टियाँ ऐसा ही करती हैं..पर यहाँ
थोड़ा अहंकार भारी पर जाता है ।सभी पार्टियाँ अपने पर अहम करती हैं जो उनके लिए कई
बार नुकस़ान दायक साबित हो जाता हैं ।सबसे ज्यादा तो हमें भुगतना पड़ता है ।
कोई अगर उनके खिलाफ कुछ बोल दे तो सारा देश
सर पे उठा लेते हैं । घर में चुप-चाप बैठकर खाना खा लेते हैं, पर जब बाहर पत्रकार
कोई अगर पूछ ले तो उनका जवाब कुछ यूँ होता है –उन्होंने फलाना बोला..मैनें खाना
छोड़ दिया...अब मैं तभी खाऊँगा जब वो मुझसे माफी मांगेंगे।
ये पता नहीं, सारे नेता क्यूं राजनिती को घर
की बात समझकर पति-पत्नि जैसी लड़ाई शुरू कर देते हैं ।क्या उनको पता नहीं.. की ये
उनका घर नहीं बल्कि राजनितीक अखाड़ा है ।आपस में बहस ऐसी करते हैं जैसे अगर छूट
मिले तो एक दूसरे को मार ही डालें ।अगर वैसा ही झंझट करना है तो किसी कुश्ति-वाड़े
में जाएं।और भी अच्छा होगा अगर वो डब्ल्यू-डब्ल्यू एफ के रिंग में जाकर आपस में
भिड़ें ।वहाँ उन्हें रेफरी भी मिल जाएगा ।दर्शक भी बरे आराम से इसका लाईव मजा
लूटेंगे ।
अगर ये कुश्ति हो जाए तो मजा आ जाए ।मोदी
बनाम मनमोहन ,सोनिया बनाम सुषमा,नितीश बनाम मांझी औऱ भी न जाने कई सारे सितारे ।इसकी
मध्यस्तता मैं खुद कर दूंगा ।मेरा भी मनोरंजन हो जाएगा ।जरा टीवी वालों की टीआरपी
के बारे में भी तो सोचिए..कहाँ से कहाँ ।सचमुच बहुत आनंद आएगा ।
पर ये डरपोक सामने आएंगे नहीं ।ये सिर्फ
सामने लड़ना जानते हैं ।पीठ-पीछे इनका याराऩा बाहर आ जाता है ।लोगों को बेवकूफ
बनाना कोई इनसे सीखे ।ये तो यही बात हो गई चोर की दाड़ी में तिनका ।
धन्यवाद
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