मेरी मुलाक़ात गुप्ता जी के साथ
इस सप्ताह मैं फिर गुप्ता जी के यहाँ से होकर
आया हूँ ।पर मुझे आश्चर्य हुआ जब मैनें उन्हें बिस्तर पर लेटा देखा ।मैनें उनसे
लगे हाथ पूछ ही लिया की ऐसी हालत क्यों । उनका जवाब था- देखो मयंक, अभी नीतीश
कुमार ने अपनी बात मनवाने के लिए अनशन पर बैठने का मन बनाया...तो मैनें भी सोचा की
इस तरीके से बात बन सकती है ।
फिर मैनें आश्चर्यचकित होकर पूछा- अरे आपको
क्या जरूरत आन पड़ी गुप्ता जी.. अनशन पर बैठने की...आपका तो जीवन भी अच्छा- खासा
चल रहा है ।
उनका जवाब तुरंत आया की- अरे मयंक, तुम्हें
क्या पता की मेरी हालत कैसी है ? रोज़ ही मुझे तुम्हारी भाभी का कपोभाजन सहना पड़ता
है.....ऐसा लगता है की, मैं करूं तो करूं क्या...आजिज हो जाता हूं.... पर कुछ कर
भी नहीं सकता....तुम्हें पता है न, की उसके समक्ष मेरी घिग्घी बंध जाती है ।
मैनें बोला- चलो ठीक है...पर खाना न खाने से
मुझे नहीं लगता की भाभी जी दया करेंगी । गुप्ता जी पिनक गए और जवाब दिया-अरे मयंक...
ऐसा क्यों बोल रहे हो ...तुम्हारे कहने का मतलब की मेरी सारी मेहनत बर्बाद गई ।
मैनें कहा- देखिए गुप्ता जी...न तो भाभी कोई
नरेंद्र मोदी जैसी बड़ी राजनेता हैं, और न ही आप किसी बड़े पार्टी के सदस्य ....की
आपके भूखे रहने से वे मान जाएंगी...और-तो-और वो उलटे खुश होंगी की उन्हें भोजन तैयार
नहीं करना होगा...।
गुप्ता जी उदास हो गए...फिर बोले...चलो ठीक
है मयंक...अबसे मैं ध्यान रखूंगा ।
धन्यवाद
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