तिवाऱी के घर मटन
तिवाऱी ने घर पर मटन खाने का न्योता क्या
दिया,मेरे मुँह में अभी से पानी आने लगा था । मैं अभी से ही पऱसों का इंतजार करने
लगा था, ताकी मैं वहाँ जाकर दावत निकाल सकूँ ।मेरी नयी-नयी इस दफ्तर में ज्वाईनिंग
थी..और पहले ही दिन तिवाऱी मेरा अच्छा दोस्त बन गया था ।दूसरे दिन मैं जब आॅफिस पहुँचा... की तिवाऱी ने सबसे पहले आकर मुझे खाने पर घर बुलाया ।
मुझे शक था, पर यकीन नहीं था की वो
मुझे इस तरह धोखा देगा ।जब मैं उसके घर खाने के लिए पहुँचा तो अहसास हुआ की मटन की
महक तो आ नहीं रही है ।बाद में पता चला की उसकी बीवी किसी कारणवश मैके चली गई
जिसके चलते उसके घर कुछ नहीं बना था ।भूख तो दोनों को ही लगी थी, तो फिर हम दोनों ने एक महँगे
रेस्तरां में खाना खाने का मन बनाया ।
पहले तो, मुझे झिझक सी हुई इतने महँगे
रेस्तराँ के अंदर खाना खाने में ।फिर ये झिझक खत्म हो गई जब तिवाऱी ने बोला की
सारा बिल वो अदा करेगा ।आखिर में हमने नौ तरह के खाने मंगवाए, जिसे हम दोनों ने मिल
कर खाया ।
पर जब बिल आया तो देखा की तक़रीबन 2500 रूपए
का खाना हम दोनों ने मिलकर खाया है ।मैं तो निश्चिंत था, क्योंकि मुझे लगा की पैसे वो देगा ।पर ये क्या,पैसे तो तिवारी के पास भी नहीं थे और अंत में सारा बिल
मुझे ही देना पड़ा ।ये कहकर की मैं तुम्हें सारा पैसा जल्द लौटा दूंगा,उसने सारा
पैसा मुझसे दिलवाया ।
फिर बाद में जब मैनें कई बार पैसे मांगे तो
आज-कल में टाल जाता था ।दोस्तों से मालूम हुआ की उसकी शादी भी झूठी थी,और उसका
दावत भी ।दरसल, वो सबको और खासकर नए लोगों को इसी तरह उल्लू बनाता है ।फिर मैनें भी
सोच ही लिया की मैं उससे पैसे निकलवा कर ही दम लूँगा ।
इस बात को एक साल बित गए और तिवाऱी शायद भूल
भी गया की उसे पैसे भी लौटाने थे ।वो कहावत है न की ,भले ही कुल्हाड़ी भुल जाए पर
पेड़ को याद होता है..की उसे काटा गया है ।ठीक उसी तरह मैनें भी नहीं भूला था ।मैनेंं भी एक प्लान बनाया उसे मजा चख़ाने का ।एक दिन हमारे आफिस में एक और नया बंदा आया
जिसका नाम आशुतोष था, जिसे हमने पहले ही सारा
माज़रा बतला दिया था ।
फिर अगले दिन की तिवाऱी आशुतोष को न्यौता दे,
आशुतोष ने पहले ही जाकर उसे दावत का न्यौता दे दिया ।हमने दावत का दिन वो चुना जिस
दिन हमें महीनें की तन्ख़्वाह मिलती है ।और जगह भी वही जो की तिवारी का घर था ।पर
आशुतोष ने ये भी बोला की दावत का पूरा खर्चा वो उठाएगा ।उसने ये भी बताया की उसके
साथ छ:ह लोग और होंगे जिनके खाने का खर्च भी वही देगा ।
आखिर दावत का वो दिन आ ही गया।हम सभी को पता
था की करना क्या है ।उस तिवाऱी के घर घंटी बजी और एक व्यक्ति चिकन-मटन सारा कुछ
लेकर उसके घर पहुँचा गया ।वो व्यक्ति दुकानदार था जो उसके घर सारा समान पहुँचाने
आया था ।हमने उस दुकानदार को पहले से बोल रखा था..की उसका काम क्या होगा ।
अब आप कहेंगे पैसे, पैसे हमने तिवाऱी से ही
दिलवाया। हमने उसे फोन पर कहा की एक आदमी उसके घर चिकन-मटन पहुँचा जाएगा..तो जरा सारा
पैसा वो देदे ।फिर आशुतोष आकर सारा पैसा उसे दे देगा ।पता नहीं कैसे उसे यकीन भी
हो गया ।फिर उसने सारा पैसा खुद दिया और हमने जमकर दावत वसूली ।हम सभी दोस्तों ने
मिलकर दावत ख़ाया ।तिवाऱी को यकीन ही नहीं हुआ की उसके घर इतने लोग खाना खाने आए
हुए हैं ।और जब उसने आशुतोष से पैसे मांगे तो वो भी आज-कल में टाल गया ।
बाद में तिवाऱी को भी पता चल गया की ये वो
लोग हैं..जो दावत वसूलने आए हैं ।अभी जब हम उन बातों को याद करते हैं , तो हमें
बहुत हँसी आती है ।
...एए..एक और बात आप लोगों को बतानी है ..आज
मैं फिर से तिवाऱी के घर न्यौते पे जा रहा हूँ ।घबराईए मत इस बार वो मुझे धोखा
देने वाला नहीं है ।उसकी शादी भी हो चुकी है और भाभी जी ने खुद मुझे खाने पर
बुलाया है ।मुझे उम्मीद है की जब हम मिलेंगे और पुरानें दिनों को याद करेंगे तो
हमें बहुत हँसी आएगी ।
Comments
Post a Comment