इन किसानों की सुनने वाला कौन
अब पछताए होत क्या जब चिडियाँ चुग गई खेत।जी हाँ, ये कहावत लगभग सही
साबित होती है उन लोगों के लिए जिन्हें अब किसानों का ध्यान आया है, जबकि वे कबसे
फसलों की बर्बादी झेल रहे हैं ।जब वे कई बार इन आला नेताओं को इस बात का इजहार कराते
रहे, तब उनकी कोई न सुना और अब ये अचानक पथ परिवर्तन कैसे ? जब से सोनिया ने किसानों से मिलने का मन क्या
बनाया, बीजेपी वाले भी इस रेस में कूद गए हैं ।
वसुंधरा राजे से लेकर राजनाथ सिंह तक, सभी इनका हाल जानने को इच्छुक
हैं ।पर तब आप कहाँ थे, जब वे आपके आगे अपने मसलों पर चीख-पुकार कर रहे थे ।इनकी
बदहाली आप ऐसे नहीं समझ पाएंगे ।सिर्फ हेलीकाप्टर से भ्रमण करने से नहीं होगा,
आपको उनके खेतों में भी जाना होगा जो सूखे पड़े हैं ।
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