वो अटल थे,अटल हैं और अटल ही रहेंगे !


एक सरल इंसान, एक अच्छे वक्ता और एक ईमांदार नेता, ये तीनों गुण आज के दशक में शायद ही किसी व्यक्ति के भीतर समाहित दिखे ।पर कोई एक है,जो इस छवि का जीता-जागता उदाहरण है । वो कोई और नहीं, बल्कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी हैं।सरकार ने आज, उन्हें भारत के सबसे बड़े सम्मान के साथ नवाज़ा है ।और वो सम्मान है भारत रत्न का जो कि सिर्फ कुछ चुनिंदा लोगों की ही कल्पना है ।

ये अटल ही हैं, जिसने भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को साझा करने प्रयास किया था ।उन्हीं के दृढ़ निश्चय ने भारत में पहली बार परमाणु परिक्षण को सफल बनाया था ।ये वही हैं, जिसने पार्टी के अंदर हो रहे अनुपयोगी गतिविधियों का विरोध किया था ।गुजरात में हो रहे दंगों पर भी, उन्होंने नरेंद्र मोदी की तीखी आलोचना की थी ।

ये वही नेता हैं, जिसके सम्मान के लिए विपक्ष भी अपने आपको निम्न समझने लगते हैं ।यहाँ तक कि, जब संसद पर पहली बार हमला हुआ तो सोनिया ने सबसे पहले अटल जी को ही फोन कर उनका हाल-चाल जाना ।ये वो हैं, जिनकी सोंच नेहरू के समान दूरगामी और गांधी जैसी स्थिर है ।वो आज के दौड़ के राजनैतिक नेताओं से बिलकुल अलग दिखते हैं ।


आज,उनके भारत रत्न मिलने पर सभी लोग प्रसन्न हैं ।चाहे वो, विपक्ष में बैठा कोई नेता ही क्यों न हो ।हर कोई,उनके भारत रत्न मिलने से खुश है । 


फोटो आभार : wikipedia.org








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