आज़ाद हूआ मसरत आलम


आख़िरकार मसरत आलम आज़ाद हो ही गया ।उसकी आज़ादी ने कई सारे सवाल खड़े कर दिए हैं।कैसे कोई आतंकी जिसके ऊपर 112 लोगों के हत्या में शामिल होने का आरोप है...इतनी आसानी आज़ाद हो गया ? दूसरी तरफ ये भारत की लचड़ राजनिती की भी पोल खोलता है ।अगर ऐसा कोई आतंकी अमेरिका के भीतर कैद हो , तो क्या वो इतनी आसानी से उसे जाने देंगे ? मुझे नहीं लगता है । अमेरिका ही क्यों.. कोई दूसरा देश भी इस तरह की गलती नहीं करेगा ।यह साफ-साफ प्रस्तुत करता है..क्या हालत है इस देश की व्यवस्था की जो लचड़ मालूम हो रही है ।

मेरा मतलब ये नहीं की निराशावादी हो जाएं...पर इस तरह के हालात देखकर आशा भी कम पर जाती है ।उस दिन सदन में जब गृहमंत्री से इस विषय पर सवाल किया गया...तो उन्होंने  कोई सटीक उत्तर नहीं दिया ।

मेरी राय में मसरत आलम का आज़ाद होना दुखद है ।उस वक्त जब देश पे आतंकी गिरोह साजिश रच रहे हैं...वाकई में मसरत आलम जैसे आतंकी की आज़ादी होना निंदनीय है ।


धन्यवाद

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