हमें वोट दो...हम नेता हैं
यही होता है तब, जब कोई नेता चुनाव के वक्त वोट मांगने आता है ।उस
वक्त तो उन्हें आम लोगों का ख्याल रहता है....पर उसके बाद क्या ?उसके बाद वो हमें भूल
जाते हैं.....और भूले भी क्यों न...उनका मतलब जो पूरा हो जाता है।मतलबी है ये
दुनिया ...और मतलबी है ये राजनिती भी ।जो नेता
जितना बड़ा मतलबी हो... वो उतना ही उँचाईयों को छूता है ।इससे पता चलता है की
मतलबी होना कितना आसान है और उससे भी आसान है नेता बनना। सिर्फ झूठ बोलना आना
चाहिए ।
सोचता हूँ नेता ही बन जाऊँ ।तभी तो सारे
छटेरे बदमाश राजनिती में अपना भविष्य खोजते हैं ।कुछ नहीं आता है तो नेता बन जाओ ।क्या
करना है ? सिर्फ झूठ ही तो बोलना है जिससे उसकी पार्टी को और ज्यादा वोट मिल सके ।
मैं कहता हूँ की आज से ही हर-एक माता-पिताओं को अपने बच्चों को नेता बनने की ट्रेनिंग देनी चाहिए ।जो बच्चा कुछ नहीं कर सकते
..उनके माँ-बाप तो ऐसा सोच ही सकते हैँ ।और डिग्री के लिए अपना तिहाड़ जेल है ना
।वहाँ से डिग्री तो मिल ही जाएगी।सिर्फ धोखाधड़ी करना आना चाहिए ।मैं कहता हूँ नेता
बनने में बड़ा दम है ।लोगों की भलाई के नाम पर सिर्फ अमीरों की जेबें भऱो और घर
में उनके पैसों से सिर्फ रोटी सेको ।
अगर नेतागिरी पर कोई स्कूल खुल जाए तो भी
अच्छा हो ।उस में पढ़ाने वाले भी बड़े गुंडे होंगे जो नेतागिरी की परिक्षा फेल कर
गए होंगे....तो उसका पाठ बच्चों में बांट रहे हैं ।मैं कहता हूँ धंधा अच्छा है ।सिर्फ
एक रूकावट है ।वो क्या ?सरकार मानेंगी की नहीं ।वो भी मान जाएगी अगर उन्हें पै.. खिलाए जाएं।आप समझ ही सकते हैं मैं कहना क्या चाहता हूँ ।
p.s:माफ किजीएगा अगर किसी को मेरी बातों से आपत्ति है तो उसके लिए मैं माफी चाहता हूँ ।
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