गुप्ता जी की कलम से
एक बार फिर मैं गुप्ता जी से मिलकर आया हूँ । उनका हमेशा यही कहना
रहता है की मोदीनामा से अच्छा है, अपना नाम जपा करो । अब आपको पता ही लग गया होगा
की कैसे मुझे अपने ब्लाग का ख्याल आया ।इस बारी फिर मैं उनसे मिल कर आया हूँ
।उन्होंने मुझे एक ग्यान दिया है ।एक कहावत सिखाई उन्होंने की- चोर हो या
चालू..सबको नचाए बंदर और भालू।
लगे हाथ मैनें इस कहावत का मतलब भी पूछ लिया ..तो वो बोले ।सुनो
मयंक-चोर मतलब कर्रप्ट और चालू मतलब जो चोर हो... पर किसी को मालूम न हो की वो
है...बंदर मतलब नेता और भालू माने पूंजिपति लोग ।
ये नेता और भालू,सभी को मिलकर उल्लू बनाते रहते हैं, फिर चाहे वो चोर
हो या फिर चोर का भी बाप ।वैसे तो गुप्ता जी कहते हैं की चोर और चालू लूटे तो ये
अच्छी बात है ...पर इनके लूटने के चक्कर में आम इंसान बर्बाद हो जाता है ।
उन्होंने इस पर एक आपबीती उदाहरण प्रस्तुत किया-जब मेरे बेटे को पैसे
चाहिए होते है तो वो किसके पास आता है ...मेरे पास...और मेरी बीवी को चाहिए होता
है कुछ तो वो किसके पास आती है...मेरे पास..मतलब दोनों ओर से पिसता मैं ही हूँ
..कहने का मतलब मैं गरीब और पैसे ले जाने वाले माँ और बेटे ।
यहाँ माँ-बेटे का मतलब आप समझ ही गए होंगे-गुप्ता
जी बोले ।जा हाँ यही होता है ..कोई लूटता है... और कोई लूटवाता है ।
धन्यवाद गुप्ता जी
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