बीबीसी-विवादों के आंगन में
आखिर बात क्या हुई जो इतना विवाद बढ़ते जा
रहा है? स्कूल, नुक्कड़ और जऩसभाओ में
इसी बात पर बहस छिड़ी हुई है । बात बीबीसी के द्वारा
बनाई गई डाक्यूमेंट्री इंडिया डॅटर की है । क्या बीबीसी की इस डाक्यूमेंट्री को
दिखाना उचित है ? मेरा ये कहना है की अगर यही बात है तो फिर सरकार ने आदेश ही क्यों दिया ? चलो आदेश दे दिया तो अब
इसे दिखाने में क्या आपत्ति है ,
शायद सरकार ये सोच रही हो की इससे कोई विवाद
न खऱा हो जाए ? फिर से कहीं विजय च़ौक पर जनसैलाब न उम़र पऱे ।अगर उम़र ही पऱे तो क्या
गलत है ? इस घटना को बीते हुए तीन साल हो गए हैं, और अब तक कोई ठोस फैसला नहीं आया
है ।तो अगर लोग फिर से आंदोलित हो ही जाएं तो इसमें गलत क्या है ?
इस घटना के बाद आपने वादा किया था की आप एक
साल के भीतर दोषियों को सजा देंगे ।समय बदल गया और सरकार भी, अभी तक कोई बऱा कदम
इस मामले पर नहीं आया है ।इसके बाद भी आप चाहते हैं की जन-क्रांति देश में न
उभड़ें तो आप सरासर गलत हैं ।
लोग फ़ासिवाद, नाजिवाद और स्टालिनवाद को ग़लत
मानते हैं, पर उसको आप क्या कहेंगे जहाँ फैसला लेने वाले ही विवादित हैं ? विधानसभा में बैठे
हमारे नेता भी तो वैसे ही हैं ।आंकड़ों के हिसाब से उसमें से कई तो अपराधी है ।फिर
उनकी सोच भी क्यों अपराधी वाली हो ना ? अगर य़कीन नहीं तो
पिछले कुछ दिनों के उनके भाषणों को ही सुनकर देखिएगा ज़रूर ।
साफ-साफ पता चलता है की सोंचने की छमता और
कार्य करने की शैली कितनी मिलती-जुलती है ।इस चीज के लिए कहीं-न-कहीं हम भी
जिम्मेदार हैं जो समाज की गंदगी से मुह फेड़ लेते हैं ।जितने रेप करने वाले
जिम्मेदार हैं उतने हमारे नेता और हम भी ।
तीनों में कोई अंतर नहीं है ।
हो सकता है आप लोग कहें की मैं पागल हूँ,-
ऐसा कैसे हो सकता है की हम भी जिम्मेदार हों ।तो भाईयों और बहनों जिनको आप अपना
लिडर चुनते हैं वो भी हममें से ही एक है । और-तो और रेप के लिए सजा काट रहा
मुज़रिम भी हमारे ही समाज का ही एक हिस्सा है ।
तो जिम्मेदार हम सब हैं ।पर सड़कों पर खऱे
होकर जन-समूह पैदा करना ये भी सही है ।कम-से-कम हम इस विषय पर सोचते तो हैं ।
धन्यवाद
चित्र शिष्टाचार: www.jansatta.com

Comments
Post a Comment